जंतर-मंतर पर भूख-प्यास से बेहाल प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने वाले जुनैद भाई के परिवार पर पुलिसिया कहर: न्याय की यह कैसी कीमत?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच एक मानवीय चेहरा सामने आया था—मोहम्मद जुनैद, जिन्हें सब प्यार से 'जुनैद भाई' कहते हैं। जुनैद वही शख्स हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और पैसों से जंतर-मंतर पर डटे सभी प्रदर्शनकारियों के लिए खाने-पीने और पानी का इंतजाम संभाला। जो युवा भीषण गर्मी और मुश्किल हालातों में हक की लड़ाई लड़ रहे थे, जुनैद भाई उनके लिए एक मसीहा बनकर खड़े हुए और लगातार उनकी सेवा कर रहे थे।
लेकिन इंसानियत की इस सेवा का उन्हें और उनके परिवार को जो सिला मिला है, वह हमारे सिस्टम की एक डरावनी तस्वीर पेश करता है।
घर पर छापा और पिता को थाने ले जाना: क्या भूखों को खाना खिलाना गुनाह है?
हाल ही में जो खबरें सामने आईं, उन्होंने झकझोर कर रख दिया है। जुनैद का आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की मदद करने की वजह से उत्तर प्रदेश पुलिस (गाजियाबाद और मसूरी पुलिस) ने उनके घर पर निशाना साधा।
- जुनैद के मुताबिक, पुलिस ने उनके घर पर दबिश दी और उनके पिता और नाबालिग भाई को हिरासत में ले लिया।
- सिर्फ इतना ही नहीं, परिवार के आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए।
- परिवार पर लगातार इस बात का दबाव बनाया गया कि वे जुनैद को पुलिस के सामने पेश करें, तभी उनके घर वालों को छोड़ा जाएगा।
एक इंसान होने के नाते दिल में यह सवाल उठता है कि जुनैद का असल जुर्म क्या था? क्या किसी प्यासे को पानी पिलाना और भूखे को खाना खिलाना इस देश में अपराध बन गया है?
लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ और सेवा का दमन
जुनैद किसी बड़े राजनीतिक पद पर नहीं हैं, न ही कोई बहुत बड़े शख्सियत हैं। वह एक आम इंसान हैं जिन्होंने सिर्फ इंसानियत के नाते प्रदर्शनकारियों की सेवा करने की ठानी। लेकिन जब प्रशासन सेवा करने वालों के परिवारों को डराने-धमकाने लगे, तो यह साफ दिखाता है कि सत्ता जनहित के कामों से कितनी डरी हुई है।
अधिकारों और इंसाफ की मांग कर रहे छात्रों या युवाओं की मदद करने वालों को इस तरह से प्रताड़ित करना न सिर्फ गैर-कानूनी है, बल्कि यह अमानवीयता की सारी हदें पार करता है।
हमारी आवाज़ उठानी होगी
आज जुनैद भाई और उनके परिवार के साथ जो हुआ, वह कल किसी के भी साथ हो सकता है। जब-जब कोई इंसानियत के पक्ष में खड़ा होगा, तब-तब इस तरह की डराने वाली कार्रवाईयों से उसकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जाएगी।

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