बिहार की सुलगती सड़कें और थम नहीं रहा पुलिस का कहर: क्या मासूमों के खून से ही लिखे जाएंगे उनके हक?
बिहार की सड़कों पर आज जो हालात बने हुए हैं, उन्हें देखकर किसी भी इंसान का कलेजा कांप जाएगा। चारों तरफ त्राहिमाम मचा है, हवा में बारूद और आंसू गैस की गंध है, और सड़कों पर गूंजती गोलियों की आवाजें यह चीख-चीख कर कह रही हैं कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। यह सब अब थमने का नाम नहीं ले रहा है, और हर गुजरते घंटे के साथ माहौल और ज्यादा डरावना होता जा रहा है।
गोलियों की गूंज और सहमे हुए बच्चे
आखिर इन बच्चों और युवाओं का कसूर क्या है? जो छात्र कल तक किताबों के साथ अपने भविष्य के सपने बुन रहे थे, आज उन्हें अपनी जान बचाने के लिए सड़कों पर भागना पड़ रहा है।
- बिहार पुलिस की तरफ से जिस तरह का आक्रामक और बर्बर रवैया अपनाया गया है, उसने सारी हदें पार कर दी हैं।
- लाठी-चार्ज और आंसुओं के दौर से शुरू हुई यह बात अब सीधी गोलियों की बौछार तक आ पहुंची है।
- सड़कों पर खून बह रहा है, मासूम छात्र मुसीबत में फंसे हैं, और घरों में बैठे मां-बाप अपने बच्चों की एक झलक पाने के लिए दुआएं मांग रहे हैं।
संवेदनहीन सिस्टम और बेलगाम खाकी का तांडव
यह किसी आम विरोध प्रदर्शन की बात नहीं है; यह एक ऐसा खौफनाक मंजर है जहां सरकार और पुलिस अपनी नाकामी छुपाने के लिए सीधे हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। जब युवा अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन पर गोलियां दाग दी जाती हैं।
क्या इस देश में अपनी आवाज उठाना, अपने हक और भविष्य की भीख मांगना इतना बड़ा गुनाह हो गया है कि इसके बदले सीने पर गोली दी जाए? बिहार की इस दर्दनाक स्थिति पर प्रशासन की खामोशी और पुलिस की यह खुली गुंडागर्दी इस बात का सबूत है कि अब आम इंसान की जिंदगी की कोई कीमत नहीं बची है।
अब और सहन नहीं किया जा सकता
एक इंसान होने के नाते, यह सब सोचना भी रोंगटे खड़े कर देता है। बिहार के इन सुलगते हालातों में जो तबाही मच रही है, उसके लिए सीधे तौर पर वह सिस्टम जिम्मेदार है जो लाठियों और गोलियों के दम पर हर आवाज को कुचल देना चाहता है।
गोलियों की इन आवाजों के बीच इन मासूम बच्चों के हक की लड़ाई को दबाया नहीं जा सकता। बिहार के इन हालात पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, निर्दोष छात्रों पर गोलियां बरसाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, और इस क्रूरता का हिसाब प्रशासन को देना ही होगा!

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