साजिश या तानाशाही? राहुल गांधी की नाक से खून और मोदी सरकार का बर्बर चेहरा
जब देश की राजधानी दिल्ली में युवाओं के भविष्य और छात्रों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाले मुख्य विपक्षी नेता को सत्ता के अहंकार में कुचला जाने लगे, तो यह साफ हो जाता है कि देश किस दिशा में जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तानाशाही और जनविरोधी नीतियों के कारण आज लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। कल जो कुछ हुआ, उसने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।
राहुल गांधी को घसीटा गया, साजिश के तहत फोड़ी गई नाक
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जब देश के पीड़ित छात्रों के समर्थन में और न्याय की मांग को लेकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे, तो मोदी सरकार के इशारे पर पुलिस ने सारी हदें पार कर दीं। तानाशाही का यह आलम देखिए कि एक राष्ट्रीय नेता के साथ जानवरों जैसा सलूक किया गया। उन्हें सड़क पर घसीटा गया, उनके साथ जबर्दस्ती की गई, और इसी छीनाझपटी व पुलिसिया लाठीचार्ज के दौरान राहुल गांधी की नाक पर गंभीर चोट आई, जिससे खून बहने लगा।
यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह उस क्रूर सत्ता का सीधा परिणाम है जो विरोध के हर स्वर को लहूलुहान कर देना चाहती है। प्रधानमंत्री मोदी और उनके हुक्मरानों की यह घिनौनी मानसिकता साफ दिखाती है कि जो भी उनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत करेगा, उसे इसी तरह शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाएगा और जेल की सलाखों के पीछे डाला जाएगा।
तानाशाही का अंत और जनता का गुस्सा
कल छात्रों पर गोलियां और लाठियां बरसाने के बाद, आज देश के शीर्ष नेताओं को इस तरह सड़क पर घसीटकर जेल में बंद कर देना इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार लोकतंत्र की हर मर्यादा को तार-तार कर चुकी है। देश के युवाओं के सपने कुचले जा रहे हैं, और जो नेता उनके हक में खड़ा हो रहा है, उसकी नाक फोड़ी जा रही है।
अब वक्त आ गया है कि इस गूंगी-बहरी और तानाशाह सरकार के खिलाफ देश की जनता सड़कों पर उतरे। मोदी सरकार का यह खौफनाक और अमानवीय चेहरा अब देश के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है, और इस जुल्म का हिसाब देश की जनता आने वाले वक्त में जरूर लेगी।

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