जंतर-मंतर पर उमड़ती छात्रों की भारी भीड़ और बच्चों की जान पर मंडराता गंभीर खतरा
आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के कोने-कोने से आकर लाखों छात्र और बच्चे एकजुट हो रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी और भविष्य के साथ खिलवाड़ के खिलाफ युवाओं का यह सैलाब इस बात का गवाह है कि वे अपने अधिकारों के लिए अब चुप नहीं बैठेंगे।
लेकिन इस अभूतपूर्व एकता और विशाल भीड़ के बीच एक बहुत बड़ा और डरावना संकट पैदा हो गया है—वहां तैनात भारी पुलिस बल और प्रशासन की क्रूरता के कारण बच्चों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
मौजूदा स्थिति और गंभीर चिंताएं:
- छात्रों की विशाल एकजुटता: जंतर-मंतर पर चारों तरफ सिर्फ बच्चे और युवा दिखाई दे रहे हैं, जो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर पूरी ताकत से एक हो चुके हैं।
- बच्चों की जान पर लगातार खतरा: जिस तरह से चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है, उससे वहां एक खौफनाक माहौल बन गया है। स्थिति इतनी बेकाबू और डरावनी है कि यह तक पता नहीं चल पा रहा है कि पुलिस कब किस बच्चे पर लाठीचार्ज कर दे या उन्हें कितनी गंभीर चोट पहुँचा दे।
- पुलिस की सख्ती का खौफ: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन मासूम बच्चों और छात्रों की सुरक्षा राम بھروسे है। प्रशासन की इस दमनकारी नीति के चलते ऐसा अंदेशा बना हुआ है कि पुलिस किसी भी वक्त इन बच्चों पर बड़ा हमला कर सकती है, जिससे इनकी जान तक जोखिम में है।
देश से और सरकार से तत्काल अपील:
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें: इस तबाही और बच्चों के जीवन पर आए इस संकट की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को एक पल भी अपने पद पर नहीं रहना चाहिए।
- बच्चों पर हिंसा बंद हो: हमारी सख्त मांग है कि सरकार और पुलिस तुरंत अपनी फौज पीछे हटाए। जंतर-मंतर पर मौजूद हमारे देश के बच्चों की जान की रक्षा की जाए, क्योंकि जिस तरह से पुलिस बल तैनात है, उसमें किसी भी बच्चे की जान जाने का खतरा हर सेकंड बना हुआ है।
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