क्या मेनका गांधी को नहीं पता सच्चाई? पिच्छिका विवाद पर जैन समाज का करारा जवाब!"

 

जैन समाज का आक्रोश: मेनका गांधी के बयान पर विवाद
विशेष आभार: इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में मुझे मेरी प्रिय मित्र ने बताया, जिसके बाद मैंने इस सच्चाई को आप तक पहुँचाने का प्रयास किया है।

मेनका गांधी के 'पिच्छिका' संबंधी बयान पर जैन समाज में भारी रोष

हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी द्वारा जैन मुनियों की 'पिच्छिका' को लेकर की गई टिप्पणी ने देश भर के जैन समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। जैन समाज ने उनके दावों को न केवल तथ्यहीन बताया है, बल्कि इसे एक धर्म विशेष की परंपराओं के विरुद्ध साजिश करार दिया है।

जैन समाज का स्पष्ट कहना है कि 'पिच्छिका' अहिंसा का प्रतीक है, न कि हिंसा का साधन। मोरों के पंख प्राकृतिक रूप से गिरते हैं, जिन्हें इकट्ठा कर मुनि उसे धारण करते हैं।

तथ्यों से परे है मेनका गांधी का दावा

जैन विद्वानों और मुनियों ने मेनका गांधी के उस दावे का खंडन किया है जिसमें उन्होंने मोरों की हत्या की बात कही थी। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि:

  • अहिंसा का आधार: दिगंबर जैन मुनि पूर्णतः अहिंसा का पालन करते हैं। पिच्छिका का उद्देश्य ही सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना है।
  • प्राकृतिक प्रक्रिया: मोर साल में एक बार अपने पंख खुद गिराते हैं। भक्त श्रावक इन पंखों को जंगलों से चुनते हैं, जिससे पिच्छिका बनाई जाती है। इसमें किसी जीव की हिंसा नहीं होती।
  • गलत प्रचार: जैन समाज का मानना है कि बिना पूरी जानकारी के धार्मिक आस्थाओं पर टिप्पणी करना समाज में असंतोष फैलाता है।

सार्वजनिक माफी की मांग

देश भर के जैन संगठनों और 'भगवान महावीर देशना फाउंडेशन' ने मेनका गांधी से इस गैर-जिम्मेदाराना बयान के लिए सार्वजनिक माफी की मांग की है। संतों का कहना है कि एक सार्वजनिक पद पर रही महिला को बोलने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी।

फिलहाल, जैन समाज के अनुयायियों में भारी आक्रोश है और वे जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर मेनका गांधी से अपने शब्द वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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