लोकतंत्र पर 'अग्निकांड' या गहरी साजिश? बंगाल के इकोस में 4000 EVM जलकर खाक, उठते ही फटने लगीं बैटरियां!

 

बंगाल के इकोस में भीषण आग: 4000 से अधिक ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनें जलकर खाक, चुनाव आयोग में हड़कंप

पश्चिम बंगाल के इकोस गोदाम में भीषण आग: 4000 से अधिक EVM और VVPAT मशीनें जलकर खाक, लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान

विशेष रिपोर्ट | प्रकाशित: जून 13, 2026 | स्थान: कोलकाता/न्यू टाउन
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सांकेतिक चित्र: पश्चिम बंगाल के सरकारी गोदाम में लगी भीषण आग के बाद का दृश्य।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन क्षेत्र के पास स्थित इकोस (ECOS) क्षेत्र के एक बड़े सरकारी और प्रशासनिक रखरखाव गोदाम में बीती रात एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ स्थित एक बेहद सुरक्षित माने जाने वाले वेयरहाउस में अचानक भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोदाम के भीतर रखी करीब 4,000 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनें पूरी तरह से जलकर खाक हो चुकी हैं। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) के गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।

प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि सुरक्षाकर्मियों और वहां मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा आसमान काले धुएं के गुबार से ढक गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि रात के सन्नाटे में अचानक गोदाम के भीतर से छोटे-छोटे विस्फोटों की आवाजें आने लगीं, जो संभवतः ईवीएम मशीनों में लगी लिथियम-आयन बैटरियों के फटने के कारण हो रही थीं। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कम से कम 12 से 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि उन्हें काबू में करने में करीब छह से सात घंटे का कड़ा समय लगा।

बड़ी लापरवाही या कोई गहरी साजिश? चुनाव आयोग ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मौके पर सबूत जुटा रही है।

घटना का क्रम और दमकल विभाग की कार्रवाई

प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की यह घटना देर रात करीब 1:30 बजे की बताई जा रही है। गोदाम के पिछले हिस्से से अचानक लपटें उठती देखी गईं। चूंकि वीकेंड होने के कारण गोदाम में केवल सीमित सुरक्षा गार्ड ही तैनात थे, इसलिए शुरुआत में आग पर काबू पाने के स्थानीय प्रयास पूरी तरह विफल रहे। सरकारी गोदाम में वेंटिलेशन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भारी तादाद होने के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया।

दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हमें रात को कॉल मिला था कि इकोस के पास एक बड़े गोदाम में आग लगी है। जब हमारी शुरुआती गाड़ियां वहां पहुंचीं, तो आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि हमें तुरंत 'स्क्वाड कॉल' एक्टिवेट करनी पड़ी और आसपास के अन्य स्टेशनों से भी दमकल वाहनों को बुलाना पड़ा। गोदाम के अंदर प्लास्टिक और फाइबर सामग्री (जिससे ईवीएम के आवरण बनते हैं) और भारी मात्रा में बैटरियां मौजूद थीं, जिसने ईंधन का काम किया और आग को बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।"

सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी ज़ोन पर सवाल

कोलकाता का न्यू टाउन और इकोस इलाका बेहद आधुनिक और सुरक्षित माना जाता है। यहाँ कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय, आईटी हब और संवेदनशील डेटा केंद्र स्थित हैं। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर ईवीएम मशीनों को रखने वाले गोदाम में अग्निशमन उपकरणों (Fire Extinguishers) और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बनकर उभरा है। सूत्रों के मुताबिक, गोदाम का फायर ऑडिट पिछले काफी समय से लंबित था, जिसे लेकर अब विपक्ष ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना के बाद से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। विपक्ष का साफ तौर पर कहना है कि आगामी स्थानीय और निकाय चुनावों को प्रभावित करने के लिए या फिर पुराने चुनावी रिकॉर्ड्स को नष्ट करने के उद्देश्य से यह कोई सोची-समझी साजिश भी हो सकती है। वहीं, सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तकनीकी दुर्घटना करार दिया है और कहा है कि इस मामले में राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

चुनाव आयोग की चिंता और आगामी चुनावों पर असर

इस भीषण हादसे में करीब 4000 ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों का नष्ट होना भारतीय चुनाव आयोग के लिए एक बहुत बड़ा तकनीकी और वित्तीय नुकसान है। एक ईवीएम और उससे जुड़ी वीवीपीएटी यूनिट के निर्माण में भारी लागत आती है और इनका एक कड़ा डेटाबेस होता है। नष्ट हुई मशीनें क्या हालिया चुनावों में इस्तेमाल की गई थीं या इन्हें भविष्य के चुनावों के लिए रिजर्व रखा गया था, इसकी स्क्रूटनी की जा रही है। जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) ने इस संबंध में एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मशीनों के जलने से आगामी समय में होने वाले कुछ उप-चुनावों या स्थानीय चुनावों की तैयारियों पर आंशिक असर पड़ सकता है, क्योंकि नई मशीनों के आवंटन और उनकी दोबारा से फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) करने में प्रशासन को काफी समय और संसाधन झोंकने पड़ेंगे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वे इस नुकसान का आकलन कर रहे हैं और जल्द ही एक विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय भेजी जाएगी।

फोरेंसिक जांच और शॉर्ट सर्किट की आशंका

शुरुआती जांच में पुलिस और विद्युत विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि गोदाम के मुख्य बिजली पैनल में हुए 'शॉर्ट सर्किट' की वजह से चिंगारी उठी होगी, जिसने पास में रखे कार्डबोर्ड बॉक्स और प्लास्टिक के बक्सों को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। इसी वजह से राज्य सरकार ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL) के विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को घटनास्थल का दौरा करने के निर्देश दिए हैं।

फोरेंसिक टीम अब वहां से जले हुए तारों के नमूने, लिथियम बैटरियों के अवशेष और सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) को अपने कब्जे में लेगी ताकि आग लगने के सही समय और सटीक कारण का पता लगाया जा सके। पुलिस ने गोदाम के आसपास के सुरक्षा गार्डों और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के बयान दर्ज करना भी शुरू कर दिया है।

निष्कर्ष और सबक

इकोस बंगाल की यह घटना देश भर में संवेदनशील सरकारी और चुनावी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा वेक-अप कॉल है। ईवीएम जैसी महत्वपूर्ण मशीनें, जो देश के लोकतांत्रिक भविष्य का फैसला करती हैं, उन्हें अत्यधिक सुरक्षित, फायर-प्रूफ और 24/7 निगरानी वाले वातानुकूलित गोदामों में ही रखा जाना अनिवार्य है। इस हादसे ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों में की गई एक छोटी सी अनदेखी कितनी बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। अब देखना यह होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस भारी नुकसान की भरपाई प्रशासन किस प्रकार करता है।

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