कौन हैं 'अगली अल्बर्ट आइंस्टीन
'? जिसने ठुकरा दिया जेफ बेजोस का करोड़ों का ऑफर!
आज की दुनिया में जब लोग करियर की शुरुआत में ही ऊँचे पैकेज और बड़ी कंपनियों के पीछे भागते हैं, तब एक ऐसी युवा वैज्ञानिक भी है जिसने लाखों-करोड़ों के ऑफर को ठुकराकर विज्ञान की सेवा को चुना है। हम बात कर रहे हैं सबरीना गोंजालेज पास्टर्सकी की, जिन्हें दुनिया आज 'अगली अल्बर्ट आइंस्टीन' के नाम से जानती है।
बचपन से ही थी कुछ अलग करने की चाहत
1993 में शिकागो में जन्मी सबरीना की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने अपना खुद का सिंगल-इंजन एयरक्राफ्ट (Zenith CH 601 XL) किट से बनाना शुरू किया। आप जानकर हैरान होंगे कि 14 साल की उम्र तक उन्होंने न केवल उस विमान को तैयार कर लिया, बल्कि उसे अकेले उड़ाया भी। उस समय उनके पास कार चलाने का लाइसेंस तक नहीं था, लेकिन वे आसमान में विमान उड़ा रही थीं।
MIT और हार्वर्ड में रचा इतिहास
सबरीना की प्रतिभा को देखकर MIT (Massachusetts Institute of Technology) ने उन्हें अपने यहाँ प्रवेश दिया। वहाँ उन्होंने फिजिक्स में अपनी डिग्री मात्र तीन साल में पूरी की और 5.0 का परफेक्ट GPA हासिल किया। ऐसा करने वाली वे दशकों में पहली महिला थीं। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी पूरी की।
क्यों दुनिया उन्हें 'अगली आइंस्टीन' कहती है?
हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान उन्होंने 'स्पिन मेमोरी इफेक्ट' (spin memory effect) की खोज की, जो गुरुत्वाकर्षण तरंगों (gravitational waves) को समझने में एक क्रांतिकारी कदम माना गया। उनकी इस रिसर्च को महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने भी अपने शोध पत्रों में उद्धृत किया था, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
करोड़ों के ऑफर को क्यों कहा 'ना'?
सबरीना की काबिलियत को देखते हुए अमेज़न के मालिक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी 'ब्लू ओरिजिन' ने उन्हें काम करने का ऑफर दिया। साथ ही, नासा (NASA) और ब्राउन यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों ने भी उन्हें करोड़ों का पैकेज ऑफर किया। लेकिन सबरीना ने इन सभी शानदार ऑफर्स को ठुकरा दिया।
उनका मानना था कि पैसा या शोहरत उनके लिए विज्ञान की मौलिक खोजों और अकादमिक स्वतंत्रता से बढ़कर नहीं है। आज वे कनाडा के 'पेरीमीटर इंस्टीट्यूट फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' में सबसे युवा शोध फैकल्टी सदस्यों में से एक हैं और 'सेलेस्टियल होलोग्राफी इनिशिएटिव' की प्रमुख हैं, जहाँ वे ब्रह्मांड के सबसे कठिन रहस्यों को सुलझाने में लगी हैं।
सीख क्या है?
सबरीना पास्टर्सकी की कहानी हमें यह सिखाती है कि यदि आपका लक्ष्य स्पष्ट हो और जुनून सच्चा हो, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी सुख-सुविधाएं भी आपको अपने रास्ते से नहीं भटका सकतीं। वे आज न केवल एक वैज्ञानिक हैं, बल्कि लाखों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा हैं जो STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
क्या आपको लगता है कि आज के दौर में करियर से ज्यादा अपने जुनून को चुनना सही है? अपनी राय कमेंट्स में जरूर बताएं!

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